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Dr. Rajan Ravichandran मशहूर नेफ़रॉलाजिस्ट (गुर्दारोग विशेषज्ञ)
डा. राजन रविचन्द्रन कहते हैं

"मधुमेह और उच्च रक्तचाप, जीर्ण गुर्दा रोग (क्रानिक किडनी डिसीज़ सी के डी) की ओर ले जा सकते हैं " >>
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मधुमेह रोग को काबू में रखने के लिये कुछ सुझाव

घर में मधुमेह स्तर की निगरानी

आजकल घर में कोशिका (केपिल्लरि) ब्लड़ शुगर माप करने के लिये सरल उपकरण उपलब्ध हैं। निरन्तर निगरानी रखने से मधुमेह का नियंत्रण आसान होता है।

आहार

मधुमेह रोगी को परिष्कृत खाद्य पदार्थ (जैसे चीनी और अन्य खाद्य पदार्थ जिनका उच्च ग्लैसेमिक इन्डेक्स हो) लेना नहीं चाहिये क्योंकि इससे अवशोषण तेजी से हो सकता है और ब्लड़ शुगर स्तर बढ़ सकता है। इसलिये यह आवश्यक है कि आहार, जितना हो सके, प्राकृतिक हो। अत्यधिक खाने से बचें ताकी शरीर का वजन नियन्त्रण में रह सके। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि शरीर का वजन आदर्श वजन के करीब हो। एक संतुलित आहार जिसमें अनाज, दाल, फल, सब्जी, दूध और दूध के उत्पाद हों, काफ़ी है।

व्यायाम

किसी भी रूप में व्यायाम करने से शुगर नियन्त्रण में सुधार होता है। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। वजन कम नहीं होने पर भी निराशा की वजह से व्यायाम करना बंद नहीं करना चाहिये।

दवाइयाँ॑

दवाइयों द्वारा चिकित्सा फिजिशियन (योग्य चिकित्सक) की उचित निगरानी में ही दी जानी चाहिये।
विभिन्न दवाइयों के समूह उपलब्ध हैं जो इन्सुलिन उत्पादन बढ़ाते हैं (ग्लिब्लेनक्लामाइड, ग्लिपिज़ाइड, इत्यादि) या इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाते हैं (ग्लिटाज़ोन्स) या शुगर का उपयोग बढ़ाते हैं (मेटफॉरमिन) या आंत से शुगर का अवशोषण कम करते हैं (एकार्बोस) इन्सुलिन खुद कई रूपों में उपलब्ध है। जो दवाइयाँ॑ इन्सुलिन उत्पादन बढ़ाती हैं, अक्सर बदन का वजन बढ़ाती हैं। दवाइयों से या तो बदन का वजन बढ़ता है या कम होता है। इसके मुताबिक ही फिसिशियन को कौनसी दवाई उचित है इसके बारे में फैसला करना चाहिये। ब्लड़ शुगर नियंत्रण में होने के बावजूद भी फिजिशियन की सलाह के बिना दवाई को रोकना नहीं चाहिये।

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